इस उम्मीद में कभी न कभी तो उसे अपने साथ लेकर आयेगी ही और इसी बहाने से मुझे उसके घर जाने का मौका मिलने लगा था। मैंने उससे पूछा- तुम्हारी माता जी कहाँ हैं?
तो उसने कहा- उनकी तबीयत सही नहीं है इसलिये उन्होंने मुझे काम करने के लिये भेजा है। मैंने उसे कुछ जरूरी बातें समझाई और दो औरतों के साथ उसे गाँव में भेज दिया और ठीक तीन घंटे बाद दोपहर के समय पंचायत घर पर आने के लिये कहा।