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मैं पागल हो चला था। अन्दर डालने के बदले पहले मैंने उनके चूतड़ों को चूमना शुरू किया लेकिन दीदी से रहा नहीं जा रहा था तो उन्होंने कहा- मेरे वीर, अब देर मत कर, जल्दी से प्यास बुझा दे। मैंने अपना लौड़ा धीरे से दीदी की चूत के मुँह पर लगाया, तभी दीदी ने धक्का लगाया और यह क्या ! वो तुरंत अन्दर सरक गया। मैंने पूछा- दीदी, क्या इससे पहले भी डाला है? यह तो आराम से चला गया?

तो दीदी ने कहा- यार, मम्मी को चुदते हुए जब भी देखा, मैंने इसमें कई उंगलियाँ एक साथ घुसाई हैं लेकिन अब तुम मिल गए हो न .

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