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जैसे ही वो बाग़ में पहुँची, साला मन तो किया कि पकड़ कर उसे बाग़ के किनारे बनी एक टूटी कोठरी में खींच ले जाऊँ, पर डर था कि अगर वो चिल्ला पड़ी तो बड़ी बदनामी होगी। इसलिए मैंने दूसरा तरीका सोचा- क्यों ना उसको हगते और मूतते हुए देखा जाए !

मैं एक पेड़ के पीछे छुप गया। वो अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर गोरे गोरे चूतड़ों को आज़ाद करती हुई हगने के लिए बैठ गई।

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