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मैं सोच रहा था कि इससे तो अच्छा था कि मैं स्कूल ही चला जाता। बुआ अब मटक मटक कर मेरे सामने घूम रही थी कुछ मुस्कुरा भी रही थी। मुझे बहुत झुंझलाहट हो रही थी पर मैं कुछ कर नहीं पा रहा था। खैर जब लगभग बारह बजे वो हरामी चपरासी अपना काम खत्म करके गया। उसके जाते ही मैंने दरवाजा जल्दी से बंद किया और भाग कर बुआ के पास पहुँचा।

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