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“, चंदा बोली. महेश थोडा खीज गया. इतनी गर्मी में बिन पंखे के दुबारा सो पाना मुश्किल था. तभी चंदा बोली,”अंदर चले चलो, पंखा चल रहा है. तारा भी सो गयी है. तुम भी आ जाओ. यहाँ तो सो नहीं पाओगे. ” बोलते बोलते ही चंदा के मन में अनेक संभावनाओं के ख्याल उठे. कान के पास एक हलकी सी सिहरन महसूस हुई. महेश सचमुच थका हुआ था और उसे काफी नींद आ रही थी.

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