उन्होने मेरी गाण्ड में खूब तेल लगाया और मुझे उल्टी करके मेरी गाण्ड में लण्ड फ़ंसा दिया। मोटे लण्ड की मार थी, सो चीख निकलनी ही थी। “अब ये तो झेलना ही पड़ेगा . . . अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड लायक बना ही लो . . . अब तो आये दिन ये चुदेगी . . . देखना ये भी चुद चुद कर गेट वे ऑफ़ इण्डिया बन जायेगी”
“धत्त, जाने क्या क्या बोलते रहते हो ?”
लण्ड की मार पड़ते ही मेरी गाण्ड का दर्द तेज हो गया।