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अभी तक कपडे बदलने का मौका उसे नहीं मिला था. उसके मन में थोडा संकोच भी था. मन का पाप भी उसे परेशान कर रहा था. उसे लगा कि अगर उसने मैक्सी पहन ली तो रात में कही कुछ अनैतिक न हो जाए. इसलिए साड़ी पहने हुए ही सोना उसने उचित समझा. जाकर तारा कि बगल में लेट गयी. हालांकि रात का वक्त था और अँधेरा बहुत था, उसे महेश काफी हद तक साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था.

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