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गर्मी तो थी ही, साथ में चंदा के तन में धीरे धीरे जो आग सुलग रही थी उसने उसकी नींद हराम कर रखी थी. आग में जलती वो कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या करे. सही-गलत का खेल अब भी उसके मन में जारी था. वहाँ महेश के मोटे लंड का आकर्षण उसे पगला रहा था और यहाँ उसकि चूत में जो आग लगी थी, उसे ठंडा भी करना था. बहुत देर तक इसी उधेड़ बुन में जलते जलते आखिर तन कि आग ने मन के द्वंद्व का निर्णय घोषित कर दिया.

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