वहाँ पर उन्होंने कुछ खरीदारी की, मुझे जींस, टी-शर्ट खरीदवाई और फिर घर आ गए। रात के साढ़े ग्यारह हो गए थे, मैं तो थक गया था। राखी बोली- आलोक, तुम जाओ ! सो जाओ ! मैं भी आराम करूंगी ! सुबह मिलते हैं !
मैं सो गया। पता नहीं रात कितने बजे राखी मेरे कमरे में आई और मेरी बगल में लेट कर मेरे लिंग पर हाथ फेरने लगी।