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अब जो भी चंदा के मन में चल रहा था उसका नाता न तो इस बात से था कि वो महेश कि मामी है, उसके माँ समान, न तो इस बात से कि महेश उससे काफी छोटा था, न इस बात से कि उसकी बेटी तारा भी उसी बिस्तर पर थी और न इस बात से कि उसका पति उसीके लिए इतनी रात में मेहनत कर रहा था. इस समय वो एक नारी नहीं एक मादा थी जिसे एक नर चाहिए था.

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