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मुझे अच्छा लग रहा था, मस्ती छा रही थी। तभी उसने मेरा पूरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया, लण्ड उसके गले तक चला गया और वो उसे ऊपर-नीचे करके चूस रहा था। मेरी मस्ती इतनी बढ़ गई थी कि मैं कह नहीं सकता। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। तभी मेरा सारा बदन अकड़ने लगा और मेरे लण्ड से एक पिचकारी की सी छूट गई। मेरा लण्ड विक्रम के मुँह में था वो मेरे लण्ड का सारा पानी पी गया।

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