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डर भी उसे खूब लग रहा था, लेकिन जिस रास्ते वो निकल चुकी थी, वहाँ से वापसी के बारे में सोचने लायक उसकी हवस ने उसे नहीं छोड़ा था. महेश के बिलकुल पास जा कर उसने अपने ब्लाउस के ऊपर के दो बटन खोल दिए. अब उसके बूबे आधे बाहर झलक रहें थे. अब उसने पेटीकोट को खींच कर अपनी चड्ढी तक कर लिया. उसकी गद्रे गोरी टाँगे और मस्त दुधिया जांघे रात के अँधेरे में भी चमक रही थी.

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