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. . ”

“दीदी, ना रे . . . तूने कभी भी इशारा नहीं किया . . . वर्ना अब तक जाने कितनी बार चुदाई कर चुके होते। ”

“बुद्धू राम, ओह्ह्. . . अब चोद ले, आह घुसा ना. . . आईईईई मर गई . . . धीरे से . . . लग जायेगी। ”

उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में उतर चुका था। शरीर में एक वासना भरी मीठी सी उत्तेजना भरने लगी। वो लण्ड पूरा घुसाने में लगा था और मैं अपनी चूत उठा कर उसे पूरा निगल लेना चाह रही थी।

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