लेकिन वाह री भाभी उसने एक बार भी भाई से ये नहीं कहा कि मैंने तो ऎसा कभी बोला ही नहीं। वो तो बस जी, हां, अच्छा ऎसे ही बोलती
रही। फ़िर उसने फ़ोन मां को दिया, भाई ने मां को भी वही बात बोली जो उसने मुझ से कही थी, मां ने हंसते हुए कहा तुझे वहां बैठ कर भी चैन नहीं है क्या ? सारा दिन क्या रश्मी (मेंरी भाभी) के बारे में ही सोचता है, काम में मन लगता है कि नहीं ? तू चिंता न कर बेटा मैं तुषार से कह दूंगी वो कभी घर के काम से बाहर जायगा तो कभी रश्मी को ले जाया करेगा।