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मेंरी किस्मत में अभी कुछ दिन और तड़फ़ना लिखा था, उसने उपर जाते हुए एक तिरछी नजर मुझ पर ड़ाली और हमारी नजर मिलते ही अपनी नजर निचे कर दिया लेकिन वो अपनी हल्की मुस्कान को मुझ से नहीं छिपा सकी और वो तेजी से सीढीयां चढते हुए अपने कमरे की तरफ़ जाने लगी। मैं भाभी को अपने कमरे में घुसते तक देखता रहा जैसे ही वो कमरे में गई मेंरे दिमाग में तुरंत ये विचार आया कि अब ये नंगी हो कर अपने कपड़े बदलेगी।

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