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फिर काफ़ी दीनो तक चलता रहा मगर असली प्यास अभी नही बुझी थी और मेरा मन उसको चोदने को करने लगा। एक दिन मैने कहा की ये सब काफ़ी हो गया क्यों ना ज़िंदगी की असली मज़ा लिया जाए तो उसने कहा कया तो मैने कहा ज़िंदगी की सुख तो चोदै मे ही हैं जो कर आदमी और औरत की ज़रूरत है तब उसने कहा इसमे कोई रिस्क तो नही मैने कहा नही सावधानी के साथ करेंगे।

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