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मगर पता नही उसे काफ़ी डर लग रहा था और हिम्मत नही जुटा पा रही थी काफ़ी समझाने के बाद उसे बिस्वास हो गया और उसने हामी भर दी और हमलोग एकांत क्स इंतेज़ार करने लगे और एक दिन हमे मौक़ा मिल गया जब मेरी मा और बहन बाज़ार गये और हम दोनो घर मे अकेले थे तब मैने कहा क्यों ना अपनी ज़िंदगी की प्यास भुझा ले उसने दबी ज़ुबान मे हा कही और फिर मैने धीरे धीरे उसके सलवार और पायज़मा को खोला अब वो ब्रा और पनती मे मेरे सामन थी उसका बदन तो मानो आपसरा का बदन लग रहा था और शर्मा रही थी और अपने चेहरे को अपनी हाथों से धके हुई थी फिर मैने धीरे से अपने कपरे को उतरा और उसके स्तन को धीरे धीरे दबाना शूरू किया शायèा उसे अच्छा लग रहा था अब मैने उसके ब्रा को खोल दिया और मेरे सामने उसके संटरे जैसे दो चीज़ आ गयी और मैने अपने मुह से उसके स्तन को चूसना शूरू किया ये अहसास उसे अच्छा लग रहा था और वो ज़यादा excited हो रही थी और मैं भी अब काफ़ी excited होने लगे।

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