“इतनी जोर से रगड़ोगे तो दर्द नहीं होगा?”
“अच्छा चलो इनका दर्द गायब कर देता हूँ मामी. ” कहते हुए महेश ने उसके एक बूबे को चूम लिया. चंदा को मानो कोई करंट लग गया हो. दुसरे बूबे को वह हलके हाथ से दबाता रहा. चंदा कि चूत इंतना पानी छोड़ रही थी कि उसकी पैंटी गीली हो गयी थी. चंदा ने फिर महेश को बड़ी मुश्किल से अपने से अलग किया और ऊँगली से नीचे कि ओर इशारा किया.