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अपने लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा, अब उसका सर पटकना कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी. मैंने अपना हाथ उसके मुंह से हटा लिया तो वो बोली सर अपने तो मेरी जान ही निकाल दी थी एक बार लगा कि यहाँ से मैं जिन्दा घर नहीं जा पाउंगी. मैं बोला मेरी जान दर्द तो एक बार हुआ होगा लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं? निधि ने कहा – सर ! मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस आप ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में रगड़ते रहिए, सच में आज ज़न्नत क अहसास हो रहा है।

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