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वो समझ नहीं पा रही थी कि इस आग का वो क्या करे. एक तरफ उसकी चूत न जाने क्यों उसके भांजे के लंड कि प्यासी थी तो दूसरी तरफ़ उसके संस्कार उसे उलाहना दे रहे थे उसके पापी विचारों पर. चंदा दोपहर का खाना बना कर, चंदर और महेश कि राह देखने लगी. चंदर ने कहा था कि आज दोपहर में खाना खाने घर आएगा और फिर महेश को साथ लेकर वी.

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