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उसने अपना हाथ ज्यों ही मेरी तरफ़ बढाया, मैंने उसे रोक दिया,”अरे यह क्या कर रहे हो . . . हाथ दूर रखो. . . क्या इरादा है?” मैं फिर से जान कर खिलखिला उठी। मैं मुड़ कर दो कदम ही गई थी कि उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर अपनी ओर खींच लिया। “नहीं मोनू नहीं . . . ” उसके मर्द वाले हाथों की कसावट से सिहर उठी। “दीदी, देखो ना कैसी बरसात हो रही है .

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