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“धत बाबूजी अभी नही , अभी तो पहला ही छोटा है ” उसने चाय ख़त्म करते हुए कहा. “अच्छा अब मैं चलूं बाबूजी ?” वो उठने लगी”थोड़ी देर और बैठो ना आरती प्लीज़” कहते हुए मैने उसका हाथ पकड़ लिया. “ये क्या करते हो बाबूजी ? कहीं किसी ने देख लिया तो ? ” उसने हाथ छुड़ाने की कोशिश नही कीमेरी हिम्मत और बढ़ गयी. मैने उसे अपने पास खींच लिया “हम दोनो के अलावा यहाँ है कौन जो हमे देखेगा आरती ?” मैने उसका एक चुम्मा ले लिया”नही बाबूजी हमे जाने दो ,हमे खराब ना करो” वो दरवाजे की तरफ जाने लगी.

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