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क्या नज़ारा था वोआरती के हंसते ही मानो सारे कमरे में मोती बिखर गये . मेरा रोम रोम खिल गया . क्या किसी औरत क़ी हँसी इतनी सुंदर भी हो सकती है”मैं तो तुम्हे सारा मेकप का सामान ही दिला दूँगा मेरी जान और अपने हाथों से तुम्हे दुल्हन क़ी तरह सजाऊंगा “कहकर मैं उसके गालो को चूमने लगा”सच बाबूजी ?” उसने मुझे ज़ोर से भींच लिया अपनी बाहों में, “ओह बाबूजी आप कितनी प्यारी बाते करते हो .

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