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कितना गर्म और मीठा दूध था आरती क़ी चुचियों कामैं एक एक बूँद चूस लेना चाहता था और शायद आरती भी यही चाहती थी इसलिए एक चुचि खाली होते ही उसने मेरे मूह में झट दूसरी चुचि डाल दी” चूसो बाबूजी और ज़ोर से चूसो , जी भर कर पियो आज अपनी आरती रानी क़ी छातियाँ , चूस चूस कर खाली कर दो बाबूजी , इनको थोड़ी नरम बना दो , इनका दर्द मिटा दो ” आरती मस्ती में बड़बड़ा रही थी “हाँ बाबूजी ऐसे ही प्यार से चूसो , हाए बाबूजी आप कितनी अच्छी तरह चूस्टे हो इतना मज़ा तो पहले कभी नही आया .

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