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वी. देखने लगी. ऐसा वह अकेले में अक्सर करती थी. टी. वी. देखते देखते किसी सिरिअल के किरदार को देखकर उसे अचानक महेश कि याद आई. फिर सुबह कि बातें भी याद आई. कुछ देर के लिए वह सब कुछ भूल चुकी थी. लेकिन फिर उसके अंदर एक अजीब सी उथल-पुथल फिर शुरू हो गयी. तभी दरवाज़े कि घंटी बजी. अचानक तन्द्रा से बाहर आकर वह सोच ही रही थी कि क्या करे कि घंटी फिर बजी.

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