हम शान्त होकर आराम से बैठ गए और दीदी घर का काम करने में लग गई। मैं छत पर चला गया। फिर दीदी भी काम खत्म करके छत पर आ गई। हम छत पर बैठे थे, दीदी बोली- मैं प्रिया को कुछ बताना नहीं चाहती थी पर उसने इतना जोर दिया कि मुझे बताना पड़ा !
मैं बोला- कोई बात नहीं ! जो होगा, देखा जायेगा !
और हम जाकर अपने अपने कमरे में सो गए।