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टकटकी लगाये वह उसके बूबों को निहार रहा था. उसने उसे बटुआ थमाया तो महेश को कुछ होश आया. जिज्ञासापूर्वक चंदा का ध्यान महेश कि पन्त कि ओर गया तो उसके लिंग में हुई हरकत उसे साफ़ साफ़ दिखने लगी. महेश बटुआ लेकर जब चला गया तो दरवाज़ा अंदर से बंद करके वह आईने के सामने कड़ी हुई और पल्लू हटा कर झुक गयी. वह देखना चाहती थी कि आखिर महेश ने क्या देखा.

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