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खाना परोसते समय नुपुर कि पल्लू हट जा रही थीऔर उसकी चुन्ची बाहर को अ रह था और उसको देख देख कर मेरमण खराब हो रह था और बाबुजी अपने लौरे को अपने धोती के उपेरसे खाभी कभी सहला रहे थे. मैं एह देख कर नुपुर के तरफ्देखा तो वो हंस परी. खाना खाने के बाद नुपुर ने दूध का गिलास्बबुजी के कमरे ले गयी, उस समय भी नुपुर कि चुंचे बाहर कोदिख रही थी.

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