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” थोरी देर के बाद बाबुजी ने नुपुर कि एक चुन्ची अपने मुँह मेले कर चूसने लगे. अपनी चुन्ची मसलाई और चुसी से नुपुर भी अब गरम हो गयी थी और उसने बाबुजी को अपने सुदोल हाथों से जाकर लिया और उनके चेहेरेको चूमने लगी और बर्बर रही थी, “ओह! बौब्जी, ससुरजी क्यओंमुझे तंग कर रहे हो, जो भी करना है जल्दी करो, मैं मारी जारही हूँ.

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