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” नुपुर तब मुस्कुरा कर्बोली, “आरे नही मेरे प्यारे चोदु ससुरजी, मैं तो कबसे तुम्हारा गधे जैसा लुंड अपनी छूट से खाने के लिए प्यासी थी,लेकिन आज तुमने जब अपना लौरा मेरी छूट मी एकाएक घुसेर दिया तोमेरी छूट कल्ला उठी. अब ठीक है और अब तुम आराम से मुझे जित्नाचाहे छोडो, मैं मुस्कुरा मुस्कुरा कर अपनी गंद उचल उचल कर्तुम्हारा लुंड अपनी छूट मी पिल्वुन्गी और तुम्हारा लौरे का सारा रुस्पनी छूट से पी जाउंगी.

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