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इतना सुन कर मैं नुपुर के छूट अन्दर अपना लुंड और ठेल कर दोमिनुते के लिया रुका और मेरा लुंड उसकी छूट के अन्दर उलटी कर दी. नुपुर कि छूट भी मेरे झरने के साथ साथ अपनी पानी चोर दिया. इसके बाद मैं और बाबुजी उसी बिस्टर पर नुपुर को बित्च मी रख करुसकी एक एक चुन्ची अपने अपने मुँह मी भर कर सो गए. सुबह जबंख खुली तो देखा कि बाबुजी का लुंड नुपुर कि छूट मी फंसा था.

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