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जरा सोचो, जब हम लोग नयी शादी कर्लेंगे तो हम को और पार्थो को नयी छूट मिलेगी छोड़ने लिए और्तुमको और नुपुर को नयी लौरा मिलेगा चुदवाने के लिए. सुबसे मजेकी बात तो एह है कि बात घर कि घर मी रहेगी. ” तब नुपुर भी मासे बोली, “सासुजी मन जाईये न, बाबुजी ठीख ही कह रहेन्हें”. “चुप हरामजादी, चिनल कुटी मुझे मालूम है कि तेरे चूत्मे हमेशा लुंड के लिए खुजली रहती है, लेकिन इसका मतलब तो एह्नाहे है कि चुदाई के लिए हमलोग आपस मी अपने आदमी बदल ले?” मानुपुर को बिगार कर बोली.

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