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इसीलिए बहनजी मैतो कहती हूँ कि अप जो भी हो रह है होने दे और चुप चाप शामिल हो जाये. ” इतना सुब सुन कर मा ने नुपुर सेबोली, “बहु मुझे तो कुछ समझ नही अत, पता नहीं तुम लोगो कोक्य हो गया है. अच्छा ले चल, अपनी मन कि मुराद पूरी कर ले. चलाज तू मुझे भी अपनी तरह चिनल बना दे और मेरी छूट मेरे बेतेके लौरे से चुदने दे.

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