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” “क्या काम”, मैंने बाबुजी सेपुचा. “रुको मैं आ रह हूँ” बाबुजी बोले और चित लेटी नंगी माके पास आ गए. उन्होने मा कि छूट को अपने दोनो हाथ से खोल कर्बोले, “ले बेटा मैं आज नुपुर कि चुदाई कि फ़ीस पुरा कर रह हूँ, लीब तू भी मेरी बीवी कि छूट मी अपना लुंड पेल कर इसको जब चाहे,जैसे चाहे छोड़. ” मैं एह सुन कर अपनी नंगी मा पर पेट के लेट गया और दोनो हाथ सयूनकी चुन्ची मसलने लगा और अपनी होतों से उनकी होतों को चुस्नेलगा.

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