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इस समय मैं तो सत्येन असमान उर रही हूँ. तुमलोग कि छूट का क्या हल है. ” मेरी ससुमा ने तब बोली, “सबश्बेती सबश, तू मेरे नाम रोशन करेगी. अपनी जवानी मी मैं भी खूब लुंड अपने छूट और गंद मी पिल्वाया है. आज तुझको अपने ससुर कयूप्पेर चार कर उनकी लुंड को अपने छूट से छोड़ते हुए देख कर बहुताच्छा लगा. तुझको देख कर मुझे अपनी जवानी कि यद् आ गयी.

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