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मामी के सोचेंगी?”
सुन कर वो भी हसने लगी. “तुम खाना परोसो, तब तक वो आ जायेगा, मैं भी हाथ पैर धो लेता हूँ. ”

बैग को एक कुर्सी के बगल में रख कर वो रसोई घर चली गयी और दोनों कि थालियाँ लगाने लगी. “चंदर मामा!”, उसने जब यह आवाज़ सुनी तो एक पल के लिए वो अटक गई. यह तो किसी वयस्क पुरुष कि आवाज़ थी. वो बाहर आई तो उसने देखा कि एक लंबा सा, पतला सा लड़का था.

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