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रानी शायद चाहती थी कि मैं उससे खूब बातें करूं और उसकी तारीफ़ करूं पर में ऐसा नहीं कर पाया। मैं अब तक रानी के बदन को देखकर मस्त हो चुका था और मैने सोचा बेटा इससे बढ़िया मौका किसी औरत के बदन से खेलने का मिलना मुश्किल है इसलिये मैं भी मौके का फ़ायदा उठाना चाहता था। रानी को क्या फ़र्क पड़ता अगर मैं वहां नहीं होता तो अनिल तो उसके साथ रोज़ ही ऐसा करता।

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