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खड़े-खड़े ही वो हम दोनों की चुदाई देख रही थी- चुपचाप !

रागिनी के मुँह से हुम्म्म हुम्म्म की अवाज निकल रही थी पर वो मेरे लण्ड पर उछल उछल कर खुद ही अपनी बुर चुदा रही थी। मैं ऐसी मस्त लौन्डिया को पाकर धन्य हो गया। कुछ देर बाद मैंने कहा- चल साली, अब घोड़ी बन। घुड़सवारी करने का मन है। वो बोली- जरूर अंकल, आपके लिए तो आप जो बोलो करुँगी।

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