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जब घर में अकेली होती और अंदर से काम देवता जागते तो स्वयंसेवा कर लेती. स्वयंसेवा तो वो अब भी करती थी. अपने शरीर को वो चंदर से बेहतर जानती थी. ऐसा नहीं था कि चंदर उसे सुखी नहीं रखते थे. उनका लिंग करीब ६ इंच का परन्तु काफी मोटा था. तारा के जन्म के बाद, शादी के ९ वर्षों के बाद, आज भी जब चंदर उसके अंदर प्रवेश करते तो कुछ पलों के लिए उसे लगता कि उसकी योनी फट जायेगी.

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