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शेखर को अचानक ध्यान आया कि अब तक उसने प्रगति को ठीक से छुआ तक नहीं है। सारी पहल प्रगति ने ही की थी। उसने करवट बदलकर प्रगति की तरफ रुख़ किया और उसके सिर को सहलाने लगा। प्रगति ने तौलिया लपेटा हुआ था। शेखर ने तौलिये को हटाने के लिए प्रगति को करवट दिला दी जिस से अब वह उल्टी लेटी हुई थी। शेखर ने उसके हाथ दोनों ओर फैला दिए और उसकी टांगें थोड़ी खोल दीं।

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