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उसने दोनों चूतडों को अच्छे से तेल लगाकर मसला और मसाज करने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था। प्रगति भी आनंद ले रही थी। उसे किसी ने पहले ऐसे नहीं किया था। शेखर के मर्दाने हाथों का दबाव उसे अच्छा लग रहा था। शेखर अब उसकी जाँघों तक पहुँच गया था। शेखर की उंगलियाँ उसकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से को टटोलने लगी। प्रगति ने अपनी टांगें थोड़ी और खोल दीं और ख़ुशी से मंद मंद करहाने लगी।

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