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प्रगति ने कहा कि कोई भी औरत ऐसे निर्णय बिना सोचे समझे नहीं लेती। वह पूरे होशो-हवास में है और अपने निर्णय पर अडिग है और शर्मिंदा नहीं है। शेखर को प्रगति के इस निश्चय और आत्मविश्वास पर गर्व हुआ और उसने तेल से सनी हुई प्रगति को उठा कर सीने से लगा लिया। इस दौरान शेखर का लिंग मुरझा गया था। प्रगति ने लिंग की तरफ देखते हुए शेखर को आँखों ही आँखों में आश्वासन दिलाया कि वह उस लिंग में जान डाल देगी।

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