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रोज का कार्यक्रम बन सा गया था। ब्ल्यू फ़िल्म देखना और फिर तड़पते हुये अंगुली या मोमबती का सहारा ले कर अपनी चूत की भूख को शान्त करती थी। गाण्ड में तेल लगा कर ठीक से मोमबती से गाण्ड को चोद लेती थी। एक दिन मेरे समधी सुरेश का फोन आया कि वे किसी काम से आ रहे हैं। मैंने उनके लिये अपने घर में एक कमरा ठीक कर दिया था।

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