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थोड़ी देर में शेखर ने पकड़ ढीली की तो दोनों अलग हुए। घड़ी में ५. ३० बज रहे थे। समय कम बचा था इसलिए शेखर ने अपने कपड़े उतारने शुरू किये पर प्रगति ने उसे रोक कर खुद उसके कपड़े उतारने लगी। शेखर को निर्वस्त्र कर उसने उसके लिंग को झुक कर पुच्ची की और खड़ी हो गई। अब शेखर ने उसे नंगा किया और एक बार फिर दोनों आलिंगन बद्ध हो गए।

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