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“धत्त, बहुत शरीर हो. . . अपनी दीदी के साथ भी ऐसा कोई करता है भला ?” लजाते हुए मैंने कहा। “कौन सी वास्तव में तुम मेरी दीदी हो, तुम तो एटम-बम्ब हो” मोनू ने अपने दिल की बात निकाली। मैंने उसे धीरे से दूर कर दिया। दीवार के पास पानी भी कम गिर रहा था। मैं फिर से बरसात में आ गई। तेज बरसात में आस पास के मकान भी नहीं नजर आ रहे थे।

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