. . . . पर माँ ने तो शाम के लिए कुछ और ही योजना बना रखी थी। कॉलेज़ खत्म करके जैसे ही मैंने घर के अन्दर कदम रखा, वैसे ही बारिश चालू हो गई। माँ ने मुझे देख कर कहा- आ गया मेरा राजा बेटा !
और यह कह कर वो छत पर कपड़े उठाने चली गई। उन्होंने उस समय वही गुलाबी सिल्की गाउन पहन रखा था। मैं भी उनके पीछे पीछे ऊपर चला गया तो वो मुझे देख कर बोली- तू ऊपर क्यों आ गया? भीग जायेगा ! चल नीचे जा !
मैं बोला- अरे माँ, मैं तो आपकी मदद करने के लिए ऊपर आया हूँ !
और आधे कपड़े उन्होंने उठाये, आधे मैंने, और नीचे आ गए।