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पर मानना है कि मेरे दादाजी भी जरुर चूत के रसिया रहे होंगे क्योंकि बेटी की उम्र का तो उनका पोता (मैं) था पर उम्र सुलभ मेरे दिमाग में भी सेक्स के कीड़े कुलबुलाने लगे थे। गाँव के लड़कियों को देख कर मेरा लंड जो करीब 7-8 इंच के करीब था और मोटा भी काफी था पजामे में तन कर खड़ा हो जाता था। गाँव में ज्यादातर खुला पाजामा या लूंगी ही पहनते थे तो लंड अक्सर उसमें तम्बू बना कर लेता था जिससे शर्म भी महसूस होती थी पर अपने लंबे और मोटे लंड को देख कर दिल में एक अजीब सी खुशी भी होती थी।

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