पर इतने दिलचस्प हादसे को शब्दों में बयान करना मेरे बस का नहीं था तो मैंने सोचा कि क्यूँ ना किसी ऐसे दोस्त की मदद ले ली जाए जो इस किस्से को सही ढंग से आप लोगों के बीच में ले आये। मुझे हिंदी में लिखना नहीं आता इसलिए मेरी यह कहानी मेरे एक मित्र राज शर्मा ने संपादित और संशोधित की है :
दिसम्बर महीने की वो रात आज भी मुझे याद आती है तो मेरी फुदकन गिलहरी मस्ती में उछल पड़ती है।