About:

मैं पुरजोर उससे छूटने का प्रयास करती रही। पर जितना मैं छूटने का प्रयास करती उतना ही उसके हाथ मेरे शरीर के अंदरूनी अंगों की तरफ बढ़ते जा रहे थे। अब तो उसके हाथ का स्पर्श मेरे शरीर में एक आग सी लगाता महसूस हो रहा था। ना जाने क्यों अब मुझे भी उसके हाथ का स्पर्श अच्छा लगने लगा था। मेरा प्रतिरोध पहले से बहुत कम हो गया था।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*