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मेरा हाथ नीचे गया तो मेरी चूत बिलकुल गीली थी और उसमें से अब भी पानी निकल रहा था। मेरी चूत अपने जीवन का पहला परम-आनन्द महसूस कर चुकी थी। पर वो किसी लण्ड से नहीं बल्कि एक अजनबी की अंगुली से हुआ था। मेरा शरीर अब ढीला पड़ चुका था और मुझ से अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था। तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज आई और उसकी पकड़ थोड़ी ढीली हुई तो मैं एकदम उसकी पकड़ से आज़ाद हो कर जल्दी से अंदर की तरफ भागी।

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